राजस्थान सरकार के राजस्व (ग्रुप-6) विभाग की ओर से 12 फरवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण पत्र जारी किया गया है, जिसमें राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण को लेकर बड़ा निर्णय सामने आया है। यह पत्र प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को संबोधित करते हुए जारी किया गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि माननीय मुख्यमंत्री द्वारा 5 फरवरी 2026 को विधानसभा में की गई घोषणा के क्रम में खेजड़ी संरक्षण को लेकर विशेष कानून लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
Rajasthan Government Khejri Ban Latest News
पत्र में उल्लेख किया गया है कि खेजड़ी वृक्ष राजस्थान की सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और सामाजिक पहचान का प्रतीक है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में इसे विशेष सम्मान प्राप्त है और आमजन की भावनाएं भी इससे गहराई से जुड़ी हुई हैं। इन्हीं जनभावनाओं और इसकी विशिष्ट पहचान को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने खेजड़ी के संरक्षण के लिए अलग से सख्त कानून लाने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि खेजड़ी सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि प्रदेश की परंपरा और पर्यावरण संतुलन का आधार है।
आदेश में यह भी बताया गया है कि 27 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री स्तर पर समाज से जुड़े संतों और प्रमुख व्यक्तियों के साथ इस विषय पर चर्चा की गई थी। उस दौरान यह सहमति बनी थी कि खेजड़ी के संरक्षण के लिए प्रभावी कानूनी प्रावधान किया जाना चाहिए। इसी क्रम में मुख्यमंत्री द्वारा संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, ताकि इस कानून को जल्द से जल्द लागू किया जा सके।
राजस्थान सरकार ने खेजड़ी को काटने पर प्रतिबंध लगाया
मुख्यमंत्री ने 5 फरवरी 2026 को विधानसभा में पुनः घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि खेजड़ी संरक्षण कानून को प्राथमिकता के आधार पर लाया जाएगा और इसे सख्ती से लागू किया जाएगा। सरकार ने यह भी साफ किया है कि प्रदेश में खेजड़ी की अवैध कटाई को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर कठोर कदम उठाए जाएंगे और जिम्मेदार अधिकारियों को प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्व विभाग की ओर से जारी इस पत्र में सभी जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में खेजड़ी संरक्षण को गंभीरता से लें और किसी भी प्रकार की अवैध कटाई की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई करें। सरकार का उद्देश्य है कि खेजड़ी वृक्षों की संख्या बढ़ाई जाए और उनके संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया जाए।
यह फैसला पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। खेजड़ी का पेड़ न सिर्फ राजस्थान के शुष्क इलाकों में जीवनदायी भूमिका निभाता है, बल्कि पशुधन, खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। ऐसे में राज्य सरकार का यह निर्णय प्रदेश में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में इस कानून के लागू होने के बाद खेजड़ी की अवैध कटाई पर कड़ा नियंत्रण होने की उम्मीद जताई जा रही है।
