सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर दायर की गई याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है। इसके साथ ही परिसीमन को चुनौती देने वाली याचिका भी खारिज कर दी गई और यह स्पष्ट कर दिया गया कि प्रदेश में पंचायत चुनाव निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही 15 अप्रैल तक कराए जाएंगे। इस फैसले के बाद राज्य में पंचायत चुनाव की राह पूरी तरह साफ हो गई है।
Rajasthan Panchyat Election Supreme Court order
मामला मुख्य रूप से पंचायत मुख्यालयों के बदलाव, परिसीमन प्रक्रिया और संबंधित गाइडलाइन के पालन को लेकर उठाया गया था। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार ने 10 जनवरी 2025 की गाइडलाइन का ठीक से पालन नहीं किया और 20 नवंबर 2025 व 28 दिसंबर 2025 की संशोधित अधिसूचनाओं के जरिए परिसीमन प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई। इन आदेशों को चुनौती देते हुए पहले हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जहां खंडपीठ ने सरकार के पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
राजस्थान पंचायत परिसीमन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अदालतों को बहुत सोच-समझकर हस्तक्षेप करना चाहिए। चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, ऐसे में इसमें दखल देना उचित नहीं होगा। अदालत ने यह भी माना कि हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले का परीक्षण कर अपना आदेश दिया है, इसलिए उसमें हस्तक्षेप करने का कोई ठोस कारण नहीं बनता। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी (स्पेशल लीव पिटीशन) को खारिज कर दिया।
15 अप्रैल तक चुनाव करवाने होंगे
अदालत के इस फैसले का सीधा असर पंचायत चुनाव की समय-सीमा पर पड़ा है। पहले याचिका के कारण चुनाव कार्यक्रम को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक पूरे कर लिए जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग पहले ही चुनाव की तैयारियों में जुटा हुआ है और प्रशासनिक स्तर पर भी व्यवस्थाएं तेज कर दी गई हैं।
सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि परिसीमन और मुख्यालय से जुड़े निर्णय प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इन्हें नियमानुसार लागू किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि हर चरण पर न्यायिक हस्तक्षेप होगा तो चुनाव समय पर कराना संभव नहीं हो पाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को महत्व देते हुए माना कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव समय पर होना अत्यंत आवश्यक है।
इस फैसले के बाद राजनीतिक दलों और संभावित उम्मीदवारों को भी स्पष्ट संकेत मिल गया है कि अब चुनाव कार्यक्रम में किसी तरह की देरी की संभावना नहीं है। ग्रामीण स्तर पर भी चुनाव को लेकर गतिविधियां तेज होंगी। प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आचार संहिता और चुनाव संबंधी नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।
कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निरंतरता और समयबद्ध चुनाव के पक्ष में माना जा रहा है। परिसीमन को लेकर उठे विवाद पर अंतिम मुहर लगने के बाद अब पूरा फोकस चुनाव की तैयारियों और निष्पक्ष मतदान पर रहेगा। प्रदेश के लाखों मतदाता अब पंचायत चुनाव में भागीदारी के लिए तैयार हैं और 15 अप्रैल तक चुनाव प्रक्रिया पूर्ण होने की संभावना है।
